- धार्मिक भेंटों के बीच भक्तों ने नतमस्तक होकर माता भद्रकाली के चरणों में हाजरी लगवाई
- हर उम्र के लोगों ने अपने हाथों में चुनरी, नारियल, चुड़ियां और व फल लेकर मां के लगाए जयकारे
-हवन-यज्ञ में आहूति डालकर सुख शांति व समृद्धि के लिए मां के चरणों में की प्रार्थना
ट्रिब्यून टाइम्स न्यूज
कपूरथला, 13 मई :
शेखूपुर स्थित माता भद्रकाली मंदिर में वार्षिक 79वां मेले के दूसरे दिन आस्था का सैलाब देखने को मिला। मेले वालिए दातिए तेरी जय जयकार, सारे भक्तां दा प्यारा मेला भद्रकाली दा, मेले लगे रहनगे मां भद्रकाली दे दरबार, सोहना लगदा दरबार मां भद्रकाली दा, धार्मिक भेंटों के बीच भक्तों ने नतमस्तक होकर माता भद्रकाली के चरणों में अपनी हाजरी लगवाई। मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ देखते हुए प्रबंधक कमेटी की तरफ से घर बैठे ऑनलाइन दर्शन करवाने की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई थी। सुबह से लेकर देर रात्रि तक भक्तों ने माता भद्रकाली के चरणों में हाजरी लगवाने के लिए बड़े उत्साह से प्रतीक्षा की। बच्चे, महिलाएं व हर उम्र के लोगों ने अपने हाथों में चुनरी, नारियल, चुड़ियां और व फल लेकर मां के जयकारे लगाए। मेले के उपलक्ष्य में माता के पिण्डी स्वरूप व मंदिर प्रांगण की फूलों और लाल चुनरियों से की गई सजाया गया। भजन मंडलियों ने महामाई का गुणगान कर भक्तजनों को माता के चरणों के साथ बांधे रखा। वहीं मंदिर प्रबंधक कमेटी की ओर से मेले के उपलक्ष्य में हवन-यज्ञ भी करवाया। हवन में श्री दुर्गा मंडल मंदिर माता भद्रकाली वैलफेयर सोसायटी पुरुषोत्तम पासी प्रधान ने आहूति डालकर सुख शांति व समृद्धि के लिए मां के चरणों में प्रार्थना की। श्री दुर्गा मंडल मंदिर माता भद्रकाली वैलफेयर सोसायटी प्रधान पुरुषोत्तम पासी ने मेले के आयोजन के लिए भक्तजनों व विभिन्न धार्मिक संगठनों का आभार व्यक्त किया। श्री दुर्गा मंडल, मंदिर माता भद्रकाली वेल्फेयर सोसायटी शेखूपुर के प्रधान पुरुषोत्तम पासी कहा कि उत्तर भारत के पावन व ऐतिहासिक स्थलों में विख्यात शेखूपुर स्थित माता भद्रकाली मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। सन 1947 में भारत-पाक के विभाजन से पहले श्रद्धालु पाकिस्तान के लाहौर के गांव शेखूपुर स्थित भद्रकाली मंदिर में झंडा चढ़ाने व मां का आर्शीवाद लेने के लिए जाया करते थे। इसी वर्ष 1947 में ठाकुर दास मेहरा ने कपूरथला के शेखूपुर में माता भद्रकाली की मूर्ति स्थापित की थी। मूर्ति की पूजा पंडित धनी राम ने विधिवत व मंत्रोच्चारण से की। इस मंदिर का एक रोचक इतिहास यह भी है कि भारत के पड़ोसी देश में रहने वाले ¨हदू सैनिक भक्त की मुराद पुरी होने पर वह माता के मंदिर में एक घंटा भेंट करना चाहता था। परंतु किसी कारणवश सैनिक अपनी मनोकामना वहां पूरी नहीं कर पाया। इसी दौरान माता भद्रकाली ने सैनिक को सपने में कहा कि अब उनका निवास भारत के पंजाब राज्य के गांव शेखूपुर जिला कपूरथला में हो गया है, वह अपनी मुराद पुरी करने के लिए पंजाब के जिला कपूरथला के गांव शेखूपुर में जाए। सैनिक ने अपनी मुराद पूरी होने पर माता भद्रकाली मंदिर शेखूपुर में घंटा भेंट किया, जो कि अभी भी मंदिर मौजूद है। अपने पवित्र व रोचक इतिहास के
कारण
धीरे-धीरे इलाके के लोगों में मंदिर के प्रति आस्था में विस्तार होता गया और लोग मंदिर में झंडा चढ़ाने लगे। पहले मंदिर छोटा सा ही था, लेकिन अब यह मंदिर विशाल रूप धारण कर चुका है। मंदिर में त्योहारों पर विशेष आयोजन किए जाते हैं। आयोजन व मंदिर की
देखरेख
के
लिए
मंदिर
कमेटी
का
गठन
किया
गया
है। 1947 में माता भद्रकाली मंदिर शेखूपुर में भक्तों के सहयोग से मेले का आरंभ किया गया मौजूदा समय में श्री दुर्गा मंडल, मंदिर माता भद्रकाली वेल्फेयर सोसायटी शेखूपुर के प्रधान पुरुषोत्तम पासी अपने साथियों सहित मंदिर की सेवा निभा रहे हैं।
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