नई दिल्ली, 2 जून
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका ने कहा कि कनाडा के नागरिक सिख युवा सरदार अजेपाल
सिंह धालीवाल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर न केवल अपना सपना
साकार किया है, बल्कि समूची सिख कौम और पंजाबियों का गौरव भी विश्वभर में बढ़ाया है।
आज दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक
कमेटी के कार्यालय में सरदार अजेपाल सिंह धालीवाल को सम्मानित करते हुए सरदार कालका
ने कहा कि माउंट एवरेस्ट जैसी कठिन और चुनौतीपूर्ण चोटी को फतह करना असाधारण साहस,
दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि सरदार अजेपाल सिंह
धालीवाल ने पिछले वर्ष भी इस अभियान के लिए प्रयास किया था, लेकिन इस बार उन्होंने
अपने अटूट विश्वास और मजबूत इरादों के बल पर सफलता प्राप्त की। उन्होंने बताया कि
13 अप्रैल से 20 मई तक लगभग 37 दिनों की लंबी और कठिन यात्रा के दौरान उन्होंने लगातार
ट्रैकिंग करते हुए माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने का गौरव हासिल किया।
सरदार कालका ने कहा कि एवरेस्ट की
चोटी पर पहुंचकर सरदार धालीवाल ने भारत और कनाडा के राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ-साथ
गुरबाणी का पावन उच्चारण भी किया, जो प्रत्येक सिख के लिए गर्व और प्रसन्नता की बात
है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सिख समुदाय के
लिए गौरव का क्षण है।
दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष
ने कहा कि अजेपाल सिंह धालीवाल जैसे युवा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
उनकी मेहनत, लगन और हौसला युवाओं को अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने तथा देश,
कौम और समाज का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करता है।
उन्होंने सरदार अजेपाल सिंह धालीवाल
को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसी शख्सियतें समाज में सकारात्मक
सोच, आत्मविश्वास और बड़े सपने देखने की प्रेरणा प्रदान करती हैं।

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