बोले-पेड़ों की कटाई व बढ़ती गर्मी
ने चिंता बढ़ा दी है
कपूरथला
पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और घटते वन
क्षेत्रों के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है,जिसका परिणाम भीषण गर्मी,जलवायु
परिवर्तन और गंभीर जल संकट के रूप में सामने आ रहा है।पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने
और बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के लिए वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी
हो गया है।यह बात शिव सेना बाला साहिब ठाकरे शिंदे ग्रुप के जिलाध्क्षय मुकेश कश्यप
ने एक प्रेस बयान जारी कही।उन्होंने कहा कि पेड़ प्राकृतिक एयर कंडीशनर की तरह काम
करते हैं।इनकी कटाई से सूर्य की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं,जिससे स्थानीय तापमान
और ग्लोबल वार्मिंग में तेजी से वृद्धि होती है।परिपक्व पेड़ वायुमंडल से भारी मात्रा
में कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर जीवनदायिनी ऑक्सीजन छोड़ते हैं।वनों के विनाश से
शुद्ध हवा का स्तर घट रहा है। पेड़ अपनी जड़ों से पानी खींचकर वाष्पोत्सर्जन द्वारा
बादलों का निर्माण करते हैं।हरियाली घटने से बारिश के चक्र में अनिश्चितता और सूखा
पड़ने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
मुकेश कश्यप ने पर्यावरण में आ रहे
नकारात्मक बदलावों और लगातार बढ़ रही गर्मी को लेकर गंभीर चिंता जताई व कहा कि पेड़ों
की कटाई व बढ़ती गर्मी ने चिंता बढ़ा दी है, ऐसे पर्यावरण संरक्षण जरूरी हो गया है।उन्होंने
कहा कि मौसम में आ रहे बदलावों के कारण गर्मी हर वर्ष नए रिकॉर्ड बना रही है,जिसका
सीधा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर पड़ रहा है।तापमान में लगातार हो रही
वृद्धि ने मनुष्यों के साथ-साथ पशु-पक्षियों और प्राकृतिक जीवन को भी प्रभावित करना
शुरू कर दिया है।उन्होंने कहा कि पर्यावरण असंतुलन का सबसे बड़ा कारण पेड़ों की अंधाधुंध
कटाई और हरियाली में आ रही कमी है।पहले शहरों और गांवों में बड़ी संख्या में पेड़ मौजूद
होते थे,जिससे वातावरण स्वच्छ और संतुलित रहता था।पेड़ न केवल हमें ऑक्सीजन प्रदान
करते हैं,बल्कि गर्मी को नियंत्रित करने और प्रदूषण कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका
निभाते हैं,लेकिन आज विकास के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई के कारण तापमान और प्रदूषण
दोनों में तेजी से वृद्धि हो रही है।उन्होंने कहा कि प्रदूषित वातावरण के कारण लोगों
में सांस संबंधी बीमारियां,एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। कई लोगों
को इलाज और ऑक्सीजन के लिए बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है,जबकि प्रकृति ने हमें पेड़ों
के रूप में मुफ्त और जीवनदायिनी ऑक्सीजन का अनमोल उपहार दिया है।उन्होंने कहा कि यदि
समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को और
भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।मुकेश कद्यप ने कहा केवल पेड़ लगाना ही
काफी नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों की उचित देखभाल (संरक्षण) भी सुनिश्चित करनी चाहिए।विकास
कार्यों के नाम पर पुराने पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें ट्रांसप्लांट करने(अन्य जगह
लगाने)की तकनीक को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।।उन्होंने कहा कि भूमिगत जल स्तर को सुधारने
और मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए जल संचयन बहुत महत्वपूर्ण है।कागज का कम उपयोग,प्लास्टिक
का बहिष्कार और प्राकृतिक संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करके हर नागरिक इसमें अपना योगदान
दे सकता है।

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