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पिछले पचीस वर्षो से राज करने वाले विधायक राणा गुरजीत ऐतिहासिक इमारत को बचाने ने नाकाम रहे-राजिंदर राजू

 


 

कपूरथला - ट्रिब्यून  टाइम्स  न्यूज :

 

विरासती शहर में कई ऐतिहासिक इमारतों को गिराए जाने को लेकर भारी आक्रोश है।ये इमारतें कपूरथला के पूर्व राज्य की शाही और औपनिवेशिक विरासत का प्रतीक हैं।इन इमारतों को कपूरथला में बन रहे मेडिकल कॉलेज और उससे संबंधित भवनों के निर्माण के लिए ध्वस्त किया जा रहा है।इस सबंधी भाजपा जिला उपाध्क्षय राजिंदर राजू ने कपूरथला स्थित सिविल अस्पताल और लेडी लिनलिथगो टीबी अस्पताल को गिराए जाने के मामले में हल्का विधायक राणा गुरजीत सिंह पर तंज कस्ते हुए कहा कि पिछले पचीस वर्षो से राज करने वाले विधायक ऐतिहासिक इमारत को बचाने ने नाकाम रहे है।उन्होंने कहा कि ये दोनों अस्पताल 1930 और 1940 के दशक के हैं और सिविल अस्पताल परिसर में ही स्थित हैं।उन्होंने कहा रणधीर जगतजीत अस्पताल(जिसे बाद में सिविल अस्पताल,कपूरथला के नाम से जाना गया)को कपूरथला के पूर्व महाराजा जगतजीत सिंह ने 1937 में जनता के लिए खोला था।इसी बीच,लेडी लिनलिथगो टीबी क्लिनिक का उद्घाटन महाराजा,वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो और लेडी लिनलिथगो ने 15 नवंबर, 1941 को किया था।चल रहे विध्वंस कार्य के दौरान सिविल अस्पताल की इमारत का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो चुका है,अब केवल एक ऐतिहासिक दीवार बची है जिस पर छोटे-छोटे झरोखे बने हैं। हालांकि टीबी अस्पताल और ब्लड बैंक अभी भी खड़ा है,भाजपा ने मांग की है कि इसे चिकित्सा विरासत के रूप में संरक्षित किया जाए।उन्होंने कहा कि पहले ही ब्लड बैंक में ब्लड की कमी च रही है अगर ब्लड बैंक भी ध्वस्त किया गया तो ब्लड के लिए हाहाकार मच सकता है।उन्होंने कहा कि शहर में एक ही ब्लड बैंक है,इस लिए टीबी अस्पताल और ब्लड बैंक को ध्वस्त होने से बचाया जाए।राजिंदर राजू ने कहा कपूरथला जो कभी पूरब का पेरिस हुआ करता था,अब पूरब के कूड़ेदान में तब्दील हो चुका है।शहर की कई ऐतिहासिक इमारतें जर्जर हालत में हैं और कुछ सरकारी उदासीनता का शिकार हो चुकी हैं।कपूरथला अस्पताल राज्य के पहले आधुनिक अस्पतालों में से एक था।इस स्मारक का विध्वंस घोर अन्याय है।लेडी लिनलिथगो टीबी अस्पताल को संरक्षित किया जाना चाहिए।राजिंदर राजू ने कहा कि ऐतिहासिक इमारतें हमारे शहर की अमूल्य धरोहर हैं,जो हमें अपने गौरवशाली अतीत, संस्कृति और वास्तुकला से जोड़ती हैं।ये इमारतें न केवल इतिहास की मूक साक्षी हैं,बल्कि ये हमारे शहर की पहचान और पर्यटन उद्योग का भी महत्वपूर्ण आधार हैं।ऐतिहासिक इमारतों का हमारे जीवन और शहर के लिए बहुत गहरा और सार्थक महत्व है।उन्होंने कहा कि ये इमारतें हमें बताती हैं कि हमारे पूर्वज कितने कुशल शिल्पकार, इंजीनियर और कला प्रेमी थे।प्रत्येक ऐतिहासिक इमारत अपने समय की सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक परिस्थितियों को दर्शाता है।ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं,जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।उन्होंने कहा इतिहास के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए ये इमारतें एक जीवंत प्रयोगशाला की तरह काम करती हैं,जिनसे पुरानी जीवनशैली और निर्माण तकनीकों की जानकारी मिलती है।

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