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बंदी सिंहों की रिहाई के लिए समूची पंथक संस्थाएं एकजुट हों : हरमीत सिंह कालका

 


 

 

अमृतसर, 6 जून 2026।

 

दमदमी टकसाल (जथा भिंडरांवाला मेहता) द्वारा हर वर्ष की भांति दमदमी टकसाल के 14वें मुखी, बीसवीं सदी के महान जर्नैल, पंथ रत्न, अमर शहीद संत ज्ञानी जरनैल सिंह खालसा भिंडरांवाले तथा उनके साथ शहीद हुए समस्त शहीदों की पावन स्मृति में गुरुद्वारा गुरदर्शन प्रकाश, मुख्यालय दमदमी टकसाल, मेहता (अमृतसर) में 42वां शहीदी समागम आयोजित किया गया।

 

इस अवसर पर विशाल समागम को संबोधित करते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका ने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई के लिए पूरे पंथ को एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चाहे इसके लिए मोर्चे लगाने पड़ें या कानूनी लड़ाई लड़नी पड़े, सभी सिख संस्थाओं और संगतों को एक मंच पर आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

 

उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी को संबोधित करते हुए कहा कि यदि बंदी सिंहों की रिहाई के लिए कोई बड़ा अभियान शुरू किया जाता है तो दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सबसे आगे खड़े होकर अपना योगदान देगी। उन्होंने कहा कि जिन सिंहों ने 35-35 वर्षों तक जेलों में रहकर सिख कौम के लिए बलिदान दिए हैं, उन्हें न्याय दिलाना और उनकी रिहाई के लिए प्रयास करना पूरे पंथ का कर्तव्य है।

 

सरदार कालका ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब में बड़े स्तर पर धर्म परिवर्तन की गतिविधियां चल रही हैं और इस विषय को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि अन्य धर्मों के प्रचारक हजारों की संख्या में अपने धर्म का प्रचार कर सकते हैं, तो सिख कौम के पास गुरु साहिबानों के अद्वितीय बलिदान, शहादतें और गौरवशाली इतिहास है, जिसे घर-घर और युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

 

उन्होंने कहा कि बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह, साहिबजादा बाबा अजीत सिंह और साहिबजादा बाबा जुझार सिंह सहित सिख इतिहास की महान शहादतों को युवाओं तक पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि सिख इतिहास की आत्मा युवाओं के दिलों में बसा दी जाए तो कोई भी सिख परिवार सिखी से दूर नहीं हो सकता।

 

उन्होंने दमदमी टकसाल, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सहित सभी पंथक संस्थाओं से सिख धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए संयुक्त और प्रभावशाली रणनीति बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल अपना कार्य करते रहेंगे, लेकिन पंथक संस्थाओं की मुख्य जिम्मेदारी सिख सिद्धांतों, इतिहास और विरासत की रक्षा करना है।

 

सरदार कालका ने कहा कि यदि सभी पंथक संस्थाएं एकजुट होकर कार्य करें तो न केवल पंजाब बल्कि पूरे भारत में खालसे की चढ़दी कला और सिखी की गूंज को और अधिक मजबूत किया जा सकता है।

 

उन्होंने जून 1984 के समस्त शहीदों को नमन करते हुए शहीद परिवारों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने दमदमी टकसाल के मुखी बाबा हरनाम सिंह खालसा का विशेष धन्यवाद किया, जिन्होंने उन्हें समागम में आमंत्रित किया और संगत के समक्ष अपने विचार रखने का अवसर प्रदान किया।

 

इस अवसर पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी भूपिंदर सिंह भुल्लर, सुखविंदर सिंह बब्बर और मनजीत सिंह भोमा सहित बड़ी संख्या में पंथक हस्तियां और संगत उपस्थित थीं। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों के साथ समागम में शामिल होकर संतों, महापुरुषों, पंथक शख्सियतों तथा बड़ी संख्या में पहुंची संगत के दर्शन करने और उन सूरबीर योद्धाओं की कुर्बानी को नमन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

 

 

 

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