असम
कांग्रेस
के
प्रदेश
अध्यक्ष
गौरव
गोगोई
ने
शनिवार
को
प्रदेश
के
विधानसभा
चुनाव
में
मिली
हार
की
जिम्मेदारी
ली
है।
मीडिया
से
बातचीत
के
दौरान
उन्होंने
कहा
कि
विधानसभा
चुनाव
के
नतीजे
बेहद
निराशाजनक
रहे
हैं।
मैंने
हाईकमान
को
भी
बता
दिया
है
कि
हम
इसकी
पूरी
जिम्मेदारी
लेते
हैं
और
अब
हाईकमान
ही
तय
करेगा
कि
संगठन
में
बदलाव
(पुनर्गठन)
के
साथ-साथ
आगे
क्या
कदम
उठाए
जाने
हैं।
इसके
साथ
ही
हमने
एक
अंदरूनी
समीक्षा
प्रक्रिया
भी
शुरू
कर
दी
है।
उन्होंने
कहा
कि
हम
अपने
पूर्व
विधायकों,
चुनाव
लड़ने
वाले
उम्मीदवारों
और
नए
चुने
गए
विधायकों
से
बात
कर
रहे
हैं,
ताकि
उनकी
राय
जान
सकें
कि
उन्हें
जमीनी
स्तर
पर
क्या
सुनने
को
मिल
रहा
है
और
भविष्य
में
हमें
क्या
करना
चाहिए।
एआईयूडीएफ
के
चीफ
बदरुद्दीन
अजमल
के
कांग्रेस
को
लेकर
दिए
बयान
पर
गौरव
गोगोई
ने
पलटवार
किया।
उन्होंने
कहा
कि
कांग्रेस
पार्टी
ने
उनकी
पार्टी
या
उनकी
सांप्रदायिक
राजनीति
को
खत्म
किया
है।
पिछले
लोकसभा
चुनावों
में
ही
वे
अपने
ही
निर्वाचन
क्षेत्र
में
हारे
और
उनकी
पार्टी
को
एक
बड़ा
झटका
लगा
था।
इस
विधानसभा
चुनाव
में
भी
जहां-जहां
उनके
विधायक
थे,
दो
को
छोड़कर
हमारे
कांग्रेस
उम्मीदवारों
ने
उन्हें
करारा
जवाब
दिया
और
उनकी
पार्टी
की
सांप्रदायिक
राजनीति
को
समाप्त
कर
दिया।
इसलिए
आज,
अगर
किसी
ने
असम
में
एआईयूडीएफ
की
सांप्रदायिक
राजनीति
को
खत्म
किया
है,
तो
वह
केवल
कांग्रेस
पार्टी
ही
है।
एआईयूडीएफ
और
एआईएमआईएम
ने
भाजपा
को
विधानसभा
चुनाव
में
मदद
करने
का
काम
किया।
हिमंता
बिस्वा
सरमा
के
बयान
पर
उन्होंने
कहा
कि
उनके
पास
विकास
का
कोई
एजेंडा
नहीं
है।
नवनिर्वाचित
सरकार
के
प्रतिनिधि
होने
के
नाते
असम
की
जो
समस्या
है,
उसे
सुलझाने
के
लिए
योजना
बनानी
चाहिए।
लेकिन
उनके
पास
एजेंडा
नहीं
है।
गौरव
गोगोई
ने
दावा
किया
है
कि
सरमा
की
बातों
से
साफ
होता
है
कि
उनके
पास
विकास
का
कोई
एजेंडा
नहीं
है।
दूसरी
ओर,चुनाव
में
मिली
हार
के
बाद
कांग्रेस
पर
उनके
सहयोगी
दलों
ने
ही
आरोप
लगाया
है।
अखिल
गोगोई
के
बयान
पर
गौरव
गोगोई
ने
कहा
कि
हमारी
पांच
पार्टियों
के
साथ
मित्रता
है।
पांच
में
चार
के
साथ
अच्छा
तालमेल
है,
वह
एक
एकमात्र
व्यक्ति
हैं,
जिनके
बारे
में
चुनाव
के
दौरान
सीएम
हिमंता
बिस्वा
सरमा
भी
कहते
थे
कि
उनसे
बात
होती
है।
अखिल
गोगोई
भाजपा
के
सुर
में
सुर
मिला
रहे
हैं,
वे
ही
बता
सकते
हैं,
ऐसी
क्या
वजह
थी।

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