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डीज़ल की बढ़ती कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया, किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य दोबारा तय करे केंद्र सरकार : दविंदर सिंह शेखों

 


 

मोहाली, 27 मई 2026 :

मिसल सतलुज जत्थेबंदी के जनरल सचिव सरदार दविंदर सिंह शेखों ने आज जारी एक बयान में केंद्र सरकार की नीतियों को किसान विरोधी करार देते हुए कहा कि डीज़ल की लगातार बढ़ रही कीमतों ने खेतीबाड़ी को गंभीर आर्थिक संकट की ओर धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि खेती की लागत में डीज़ल सबसे बड़े खर्चों में से एक है, लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2026 की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पुरानी डीज़ल कीमतों के आधार पर तय कर दिए गए हैं, जो किसानों के साथ बड़ी नाइंसाफी है।

 

सरदार शेखों ने कहा कि कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज़ (CACP) फसलों के दाम निर्धारित करते समय खेती से जुड़े सभी खर्चों को ध्यान में रखता है। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टरों, ट्यूबवेलों और अन्य कृषि मशीनरी को चलाने के लिए बड़े स्तर पर डीज़ल की आवश्यकता होती है और डीज़ल के बढ़े हुए दामों ने किसानों की आय और आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ केंद्र सरकार लगातार डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है, जबकि दूसरी तरफ किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य देने से पीछे हट रही है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार विदेशों की तर्ज पर किसानों के लिए सब्सिडी वाला डीज़ल उपलब्ध करवाए या फिर बढ़ी हुई डीज़ल कीमतों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की दोबारा समीक्षा कर नए दाम तय करे।

 

सरदार दविंदर सिंह शेखों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों की जायज़ मांगों को नजरअंदाज किया गया तो खेतीबाड़ी क्षेत्र और गहरे संकट में फंस सकता है। उन्होंने कहा कि मिसल सतलुज जत्थेबंदी पंजाब के किसानों के अधिकारों और खेतीबाड़ी को बचाने के लिए हर मंच पर अपनी आवाज़ मजबूती से उठाती रहेगी।

 

 

 

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