नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक बड़े फर्जी जीएसटी इनवॉइसिंग रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस संगठित गिरोह के जरिए लगभग 128 करोड़ रुपए के फर्जी जीएसटी लेनदेन किए जाने का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में 24 मार्च 2026 को एफआईआर संख्या 66/2026 दर्ज की गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि एक अनजान व्यक्ति के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और बायोमेट्रिक विवरण का दुरुपयोग कर सितंबर 2025 में मेसर्स आरके एंटरप्राइजेज नाम से एक फर्जी फर्म बनाई गई थी। पीड़ित को इस फर्म के अस्तित्व की जानकारी तक नहीं थी। इसी फर्म के माध्यम से 128 करोड़ रुपए से अधिक के लेनदेन किए गए और लगभग 10 करोड़ रुपए का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लिया गया। तकनीकी निगरानी, जीएसटी रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में यह सामने आया कि दिलीप कुमार और राज कुमार दीक्षित इस रैकेट के मुख्य साजिशकर्ता थे। इनके अलावा अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद ने भी फर्जी कंपनियों के संचालन, बैंक खातों की व्यवस्था और ऑनलाइन लेनदेन के जरिए इस नेटवर्क को चलाने में अहम भूमिका निभाई।
जांच
में
यह
भी
सामने
आया
कि
यह
गिरोह
फर्जी
दस्तावेजों
और
पहचान
पत्रों
का
इस्तेमाल
कर
शेल
कंपनियां
बनाता
था
और
उन्हें
वास्तविक
कारोबार
के
रूप
में
पेश
करता
था।
इन
कंपनियों
के
माध्यम
से
बिना
किसी
वास्तविक
माल
या
सेवा
की
आपूर्ति
के
फर्जी
जीएसटी
बिल
तैयार
किए
जाते
थे,
बैंकिंग
चैनलों
के
जरिए
पैसे
घुमाए
जाते
थे,
नकद
के
बदले
फर्जी
एंट्री
दी
जाती
थी
और
गलत
तरीके
से
इनपुट
टैक्स
क्रेडिट
का
लाभ
उठाया
जाता
था।
इस
पूरी
प्रक्रिया
के
जरिए
सरकारी
राजस्व
को
भारी
नुकसान
पहुंचाया
गया।
ईओडब्ल्यू
की
विभिन्न
टीमों
ने
एसीपी
वीरेंद्र
कादयान
के
नेतृत्व
में
दिल्ली-एनसीआर
के
कई
स्थानों
पर
समन्वित
छापेमारी
कर
15 मई
2026 को
सभी
आरोपियों
को
गिरफ्तार
किया।
आरोपियों
से
पूछताछ
के
बाद
उन्हें
विधि
अनुसार
गिरफ्तार
कर
लिया
गया।
गिरफ्तारी
के
दौरान
पुलिस
ने
51.12 लाख
रुपए
नकद,
फर्जी
दस्तावेज
और
स्टांप,
बड़ी
संख्या
में
फर्जी
इनवॉइस,
15 मोबाइल
फोन,
कई
सिम
कार्ड,
दो
लैपटॉप
और
दो
कारें
बरामद
की
हैं।
जांच
में
करीब
50 शेल
कंपनियों
की
पहचान
भी
की
गई
है,
जिनका
उपयोग
इस
रैकेट
में
किया
जा
रहा
था।
आरोपियों
में
राज
कुमार
दीक्षित
को
इस
पूरे
गिरोह
का
मास्टरमाइंड
बताया
जा
रहा
है,
जिसने
करीब
250 शेल
कंपनियों
का
नेटवर्क
खड़ा
किया
था।
अन्य
आरोपी
भी
फर्जी
जीएसटी
रजिस्ट्रेशन,
इनवॉइसिंग,
बैंक
खातों
के
संचालन
और
पैसों
के
लेनदेन
में
सक्रिय
रूप
से
शामिल
थे।
फिलहाल
पुलिस
इस
रैकेट
से
जुड़े
अन्य
लाभार्थियों
और
संबंधित
संस्थाओं
की
पहचान
करने
में
जुटी
हुई
है।
अधिकारियों
का
कहना
है
कि
जांच
आगे
बढ़ने
के
साथ
इस
मामले
में
और
बड़े
खुलासे
हो
सकते
हैं।

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