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बजरंग दल के नेताओं ने माता भद्रकाली के 79वें वार्षिक ऐतिहासिक मेले के अवसर पर शेखूपुरा मंदिर में टेका मत्था

 


 

आनंद यादव,ईशांत मेहरा और मणि महाजन ने सभी के कल्याण के लिए की प्रार्थना

 

 

कपूरथला

 

शेखूपुर स्थित माता भद्रकाली मंदिर में 79वें वार्षिक ऐतिहासिक मेले को के दौरान बजरंग दल के जिला अध्यक्ष आनंद यादव के नेतृत्व में बजरंग दल के नेताओं विश्व हिन्दू परिषद के जिला उपाध्क्षय पवन शर्मा,जिला उपाध्यक्ष गुलशन मेहरा और सुरक्षा प्रमुख मणि महाजन की उपस्थिति में माता भद्रकाली मंदिर में मत्था टेककर सभी के कल्याण की प्रार्थना की।इस दौरान मंदिर कमेटी के अध्यक्ष परशोत्तम पासी,चेयरमेन राधे श्याम और राजेश शर्मा (शेखूपुर)ने सभी बजरंग दल सदस्यों का स्वागत किया और प्रार्थना की कि माता रानी सभी बजरंग दल नेताओं के सिर पर अपनी कृपा बरसाएं रखे,उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करें और उन्हें चढ़दी कला प्रदान करें।इस अवसर पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष परशोत्तम पासी,चेयरमेन राधे श्याम और अन्य सदस्यों ने सभी बजरंग दल पदाधिकारियों को शिरोपा और स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया।इस अवसर पर बजरंग दल के नेताओं ने श्री दुर्गा मंडल मंदिर माता भद्रकाली शेखूपुर कपूरथला के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने माता भद्रकाली के चरणों में प्रार्थना की और कहा कि माता भद्रकाली जी का आशीर्वाद आप सभी पर बना रहे और आप सभी सदस्य ऐसे ही लोगो को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते रहे।बजरंग दल के नेताओं ने कहा कि उत्तर भारत के पवित्र और ऐतिहासिक स्थलों में से एक माने जाने वाले जिले के शेखूपुर में स्थित माता भद्रकाली मंदिर भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र है।आनंद यादव ने कहा कि लोगों को धर्म से जोड़ने के लिए माता भद्रकाली मंदिर कमेटी के प्रयास सराहनीय हैं,क्योंकि मंदिर केवल ईश्वर से मिलने का स्थान ही नहीं,बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन के केंद्र भी हैं।आधुनिक युग में जब युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है,तब मंदिर कमेटिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।बजरंग दल के नेताओं ने कहा कि मंदिर कमेटिया भजन,कीर्तन,योग और धार्मिक कथाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को धर्म की ओर आकर्षित कर रही है,जिससे वे अपनी संस्कृति को समझ सकेंगे।मंदिरों के माध्यम से सामुदायिक आरती,भोज और त्योहारों का आयोजन समाज में एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।कई मंदिर कमेटिया धर्म के साथ-साथ सामाजिक सेवाएं(जैसे शैक्षिक सहायता, चिकित्सा शिविर)और संस्कार शिक्षा(गुरुकुल/पाठशाला) भी चलाती हैं,जो धर्म का सही अर्थ सिखाती हैं।धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों(जैसे नवरात्रि,दिवाली)का आयोजन प्राचीन परंपराओं को जीवित रखने में सहायक होता है।तीर्थ स्थलों की यात्राओं का आयोजन करके समितियाँ भक्तों के आध्यात्मिक अनुभव को समृद्ध करती हैं।उन्होंने कहा कि मंदिरो को समाज के हर वर्ग के लिए चिंता का केंद्र बनना चाहिए।मंदिर कमेटिया के ये प्रयास समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को उनके धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूक बनाते हैं।मंदिर कमेटिया की निस्वार्थ सेवा और समर्पण की हम तहे दिल से सराहना करते हैं।

 

 

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