ओटावा
अल्बर्टा में कनाडा से अलग होकर स्वतंत्र देश बनने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। अलगाववादी नेताओं ने दावा किया है कि उन्होंने जनमत संग्रह यानी रेफरेंडम कराने के लिए जरूरी समर्थन जुटा लिया है। इसके बाद कनाडा की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। अलगाववादी संगठन के नेताओं के मुताबिक उन्होंने करीब तीन लाख हस्ताक्षर चुनाव अधिकारियों को सौंपे हैं, जबकि रेफरेंडम की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए करीब 1.78 लाख हस्ताक्षरों की जरूरत थी। आंदोलन के नेता मिच सिलवेस्ट्रे ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि अब आंदोलन नए चरण में पहुंच चुका है। हालांकि इतने हस्ताक्षर जुट जाने का मतलब यह नहीं है कि वोटिंग पक्की हो गई है। पहले चुनाव आयोग इन हस्ताक्षरों की जांच करेगा। फिलहाल अदालत के आदेश की वजह से इस प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगी हुई है।रिपोट्र्स के मुताबिक अगर कानूनी अड़चनें खत्म हो जाती हैं, तो 19 अक्तूबर को प्रस्तावित बड़े जनमत संग्रह के दौरान अलगाव पर भी वोटिंग कराई जा सकती है। इसी दिन संविधान और इमिग्रेशन जैसे दूसरे मुद्दों पर भी मतदान की तैयारी है। अगर मामला वोटिंग तक पहुंचता है, तो अल्बर्टा के लोगों से सीधा सवाल पूछा जाएगा कि क्या वे कनाडा से अलग होकर स्वतंत्र देश बनाना चाहते हैं। हालांकि फिलहाल सामने आए सर्वे बताते हैं कि सिर्फ करीब 30 प्रतिशत लोग ही अलग देश बनने के पक्ष में हैं।इसके बावजूद अलगाववादी नेताओं का दावा है कि वोटिंग के समय समर्थन बढ़ सकता है। अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने कहा है कि अगर जरूरी हस्ताक्षर सही पाए जाते हैं तो वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत वोटिंग आगे बढ़ाएंगी।अल्बर्टा कनाडा का सबसे बड़ा तेल और गैस उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। देश के कुल तेल उत्पादन का करीब 84 प्रतिशत हिस्सा यहीं से निकलता है। यहां के लोगों का आरोप है कि उनकी कमाई काबड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में ओटावा चला जाता है, लेकिन फैसले लेते समय उनकी राय को ज्यादा महत्व नहीं मिलता।

Post a Comment