कपूरथला 6 मई
ट्रिब्यून टाइम्स न्यूज :
यह समय केवल चर्चा का नहीं,बल्कि ठोस कदम उठाने का है।भारत और सनातन धर्म पर बढ़ते हुए खतरे अब किसी से छिपे नहीं हैं।हमारी सांस्कृतिक जड़ें, धार्मिक परंपराएं और वैदिक मूल्यों को संरक्षित रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।इसलिए अब आवश्यकता है कि हम सभी एकजुट होकर अपने धर्म और देश की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।यह बात विश्व हिन्दू परिषद जालंधर विभाग के अध्क्ष्य नरेश पंडित,बजरंग दल के जिला सह संयोजक एडवोकेट मुकुल अरोड़ा व नगर संयोजक मोहित जस्सल ने एक संयुक्त प्रेस बयान जारी कर कही।नरेश पंडित ने कहा कि जिस आदिवासी ने अपनी परंपरा और पूजा पद्धति छोड़ दी,वे ईसाई ही जनजातियों के आरक्षण का 80 प्रतिशत हिस्सा हड़प रहे हैं और वास्तविक आदिवासियों का हक मार रहे हैं।उन्होंने कहा कि हिन्दू ही हिन्दू की आबादी घटा रहा है,जबकि मुसलमानों और ईसाइयों की आबादी लगातार बढ़ रही है।विश्व में 50 से अधिक इस्लामिक और 120 ईसाई देश हैं,जबकि भारत और नेपाल ही ऐसे देश हैं,जहां हिन्दू बहुसंख्यक हैं।ऐसे में हिन्दू समाज को अपने अस्तित्व,परंपराओं और पहचान को लेकर गंभीरता से विचार करना होगा।हिन्दू समाज विश्व का सबसे प्राचीन समाज है,जो हजारों-लाखों वर्षों से अस्तित्व में रहा है।उन्होंने भगवान श्रीराम के वनवास,राम मंदिर आंदोलन और झारखंड के लगभग दो हजार गांवों से सरनास्थलों की मिट्टी के राम मंदिर निर्माण में उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्राचीन परंपराओं की जीवंत मिसाल है।उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक हिन्दू को अपनी संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।उन्होंने कहा कि संविधान में जनजातीय शब्द और आरक्षण का प्रावधान जनजातीय समाज की परंपरा,पूजा-पद्धति और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए किया गया था।उन्होंने आरोप लगाया कि 1947 के बाद आरक्षण का बड़ा हिस्सा ईसाई मिशनरियों से जुड़े लोगों ने लिया,जबकि परंपरागत आदिवासी लाभ से वंचित रह गए।नरेश पंडित ने कहा कि आज बड़ा संकट यह है कि दिए गए अधिकारों का दुरुपयोग कर हिन्दू परंपराओं का अपमान किया जा रहा है।जनजातीय समाज को अपनी परंपरा की रक्षा का अधिकार है और इस विषय पर गंभीर विमर्श आवश्यक है।नरेश पंडित ने कहा कि हिन्दू समाज केवल एक-दो वर्ष नहीं,बल्कि सैकड़ों वर्ष आक्रमणों का शिकार रहा है।आस्था के केंद्र रहे मंदिरों को तोड़ा गया,जिससे समाज का आत्मबल कमजोर हुआ।इस दीर्घ आक्रमण काल में हिन्दू समाज का विघटन हुआ,जिसके लिए कहीं न कहीं समाज स्वयं भी जिम्मेदार रहा,क्योंकि हम अपनी व्यक्तिगत चिंताओं में उलझते चले गए।बाहरी आक्रमणकारियों ने समाज में विभाजन पैदा किया,जिससे देश गुलाम हुआ।यदि सभी जातियों के लोग मिलकर कार्य करें,तो देश को फिर से सशक्त बनाया जा सकता है।आज भी हिन्दू समाज को तोड़ने के प्रयास हो रहे हैं,लेकिन संगठन और एकता से हर चुनौती का सामना करना संभव है।नरेश पंडित ने कहा कि वर्तमान समय में सभी हिंदुओं को एकजुट होने की आवश्यकता है।समाज को कमजोर करने वाली शक्तियों का मिलकर मुकाबला करना होगा।हिंदू धर्म में भगवान एक ही हैं।जिन्हें लोग विभिन्न रूपों में पूजते हैं।माता दुर्गा,भगवान विष्णु,भगवान शिव सहित सभी देवी-देवता उसी परम शक्ति के स्वरूप हैं। धर्म और संस्कृति की रक्षा तभी संभव है,जब समाज एकजुट होकर अपने संस्कारों और परंपराओं का सम्मान करे।नरेश पंडित ने लोगों से हनुमान चालीसा का पाठ करने और हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया

Post a Comment