नई दिल्ली 6 मई ,2026
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार
हरमीत सिंह कालका ने गुरु गोबिंद कॉलेज ऑफ कॉमर्स, पीतमपुरा के 42वें वार्षिक दिवस
समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह कॉलेज केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि
विरासत, संस्कारों और उच्च मूल्यों का प्रतीक है।
उन्होंने इस अवसर पर दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर
सरदार चरणजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, कैबिनेट मंत्री सरदार मनजिंदर
सिंह सिरसा, कॉलेज के चेयरमैन सरदार एम.पी. सिंह, डीएसजीएमसी के जनरल सेक्रेटरी जगदीप
सिंह काहलों, सरदार गुरविंदर पाल सिंह, प्रिंसिपल मैडम, समस्त फैकल्टी तथा उपस्थित
साध संगत का सम्मान करते हुए सभी को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
सरदार कालका ने गर्व के साथ कहा कि इस कॉलेज से उनकी
जड़ें गहराई से जुड़ी हुई हैं और उनके दादा सरदार जसवंत सिंह कालका, जो उस समय दिल्ली
सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष थे, के हाथों इस कॉलेज की नींव रखी गई थी।
उन्होंने कहा कि कॉलेज की प्रगति और ऊंचाइयों को अपनी आंखों से देखना उनके लिए गर्व
की बात है।
उन्होंने प्रमुख अतिथियों की उपलब्धियों का उल्लेख
करते हुए कहा कि सरदार चरणजीत सिंह संधू की विरासत महान सिख नेता सरदार तेजा सिंह समुंदरी
से जुड़ी हुई है, जिन्होंने सिख इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि
यह विरासत और सेवा का जज़्बा आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के राजनीतिक सफर
को प्रेरणादायक बताते हुए उन्होंने कहा कि 1995 में छात्र राजनीति से शुरू हुआ यह सफर
आज उच्च पद तक पहुंच चुका है, जो युवाओं के लिए एक मिसाल है।
सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व की सराहना करते
हुए उन्होंने कहा कि बतौर अध्यक्ष दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, कोरोना महामारी
के दौरान और किसान आंदोलन के समय उनके द्वारा निभाई गई सेवा और समर्पण बेमिसाल है,
जिसने समाज में सेवा की एक नई मिसाल कायम की।
सरदार कालका ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा
कि जीवन में ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए मेहनत, संघर्ष और निरंतर अभ्यास अत्यंत
आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “जैसे सोना आग में तपकर कुंदन बनता है, उसी प्रकार मनुष्य
भी मेहनत से निखरता है।”
उन्होंने प्रार्थना की कि यह शैक्षणिक संस्थान भविष्य
में और भी बुलंदियों को छुए तथा देश और समाज की सेवा करते हुए विद्यार्थियों को उच्च
मुकाम तक पहुंचाए।
यह समारोह ज्ञान, विरासत और प्रेरणा का सुंदर संगम
साबित हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को नई ऊर्जा और उत्साह से भर दिया।

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